किस्मत में लिखा था तो पी मैंने ।
अगर मैं ना पीता तो होता बर्बाद ,
थोड़ी सी पीकर क्या खता की मैंने।।
अंजान बनकर वो मुझे बेजान कर गया ,
साथी का कत्ल सरेआम कर गया ।
महसूस तो होती थी उनकी हकीकत ,मैं मुफ्त में अपनी जिंदगी कुर्बान कर गया ।।
तेरी यादों में ये दिल बेकरार होगा ,
हमें मालूम न था इस क़दर प्यार होगा ।
जाने कब खत्म होगी ये तन्हाइयां,
हर पल अब तो तेरा ही इंतजार होगा ।।
आंख अगर खुलकर बरस जाए तो क्या होगा ,
दिल का हर घाव उभर जाए तो क्या होगा ।
ऐ मुर्दों को कफन देने वाले अगर , मुर्दो में भी जान आ जाए तो क्या होगा ।।
एहसान मेरे दिल पर तुम्हारा है दोस्तों ,
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों ।
बनता है मेरा काम तुम्हारे ही नाम से ,
बचपन तुम्हारे साथ गुजारा है दोस्तों ।।
ना समझे राज दिल का वो ज़ालिम
प्यार का जाने ,
तड़पते दिल की हालत हुस्न की दीवार
क्या जाने ।
तुम्हे तो कत्ल करना और तड़पाना ही
आता है ।
गला किसका कटा क्यों कटा ये तलवार
क्या जाने ।।
ये महलों ये तख्तों ये ताजों की दुनिया ,
ये इंसान के दुश्मन समाजों की दुनिया ।
ये दौलत के भूखे रिवाजों की दुनिया ,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है।
तेरी गलियों में हम जिस दिन से आ बैठें हैं ,
गमें दुनिया से हम दिल लगा बैठे हैं ।
जिस क़दर डस रहा है मुहब्बत का रोग ,
हम यह किससे कहां दिल लगा बैठे ।।
तुम तो सोती होगी चैन की नींद ,
हम तुम्हारी यादों में ही सो लेते हैं ।
पलकों को आपकी राह में बिछाकर ,
अपने लवों को हम सी लेते हैं ।।
शब्दहीन नंगे अर्थ लेकर जिंदगी जिता हूं ,
प्यार के नाम पर कड़वे घूंट पीता हूं ।
लोग प्यार करते हैं एक झिझक के साथ ,
मैं उसी झिझक के बीच जीता -मरता हूं ।।
बेसहारा बेनकाब ना कोई कर दे ,
यही तकरार लेकर मन में सांस लेता हूं ।
प्यार के नाम पर जलती है दुनिया तो जले ,
मैं तो इसी तमन्ना के सहारे जिता हूं ।।
लोग नफ़रत से देखें तो कोई बात नहीं ,
तेरी नज़र में बस प्यार हो तो बात बने ।
दुनिया की परवाह क्या वो कहती ही रहें ,
तू मुझे प्यार से बांहों में भरे तो बात बने ।।
जीने का राज़ मैंने मुहब्बत से पा लिया ,
जिसका भी गम मिला उसे अपना बना लिया ।
जब सुनाने को कोई ना मिला दास्तानें गम ,
तो आइना रखकर सामने ख़ुद को रूला लिया।।
बर्बाद हो गये हम , उन्हें अपना समझ के ।
कुछ पा न सके सिवाय , गम के हम दिल लगा के ।।
मुहब्बत के जाम हमने पीये थे चूम -चूम के अब पीने पड़ रहे हैं जाम खून -खून के ।।
अक्सर जब हम आपको देखते हैं ,
अपने रब से यहीं फरियाद करते हैं ।
उम्र हमारी भी लग जाये आपको क्योंकि ,
हम आपको खुद से भी ज्यादा प्यार करते हैैं ।।
जन्नत की परी हो तुम दुनिया में क्यो आई हो ,
संगमरमर सा ये जिस्म कहा से पाईं हो ।
तुम सा हसीं कभी देखा ही नहीं ,
लगता है शबनम में नहाकर आईं हो ।।
जब भी आपसे मिलने की तकदीर नज़र आई ,
एहसास के पैरों पर जंजीर नज़र आई ।
जब गौर किया गिरते हुए आंसुओं पर ,
हर आंसू पर सिर्फ तेरी तस्बीर नजर आई।
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