बड़े होकर भाई-बहन सोचों कितने दूर हो जाते है, व्यस्त है सभी इतना कि मिलन को मजबूर हो जाते है ।
एक दिन भी जिनके बिन हम रह नही पाते थे ,
अब सब अपनी जिन्दगी मे मसरुफ हो जाते हैं ।
छोटी-छोटी बातें बताए बिन हम रह नही पाते थे ,
अब बड़े - बड़े मुश्किलों से हम अकेले ही जूझ जाते हैं ।
ऐसा भी नही कि उनकी अहमियत नही है कोई,
पर अपनी तकलीफें जाने क्यों उनसे छुपाते हैं ।
रिश्ते नयी जिन्दगी से कितने जुड़ते चले जाते है ,
और बचपन के रिश्ते कही दूर चले जाते है ।
खेल - खेल मे रुठना मनाना रोज की बात थी अब छोटी सी गलतफहमी दिल से दूर कर जाती है।
अब सब अपनी उलझनों मे उलझ के रह जाते है
कैसे बताए उन्हें हम वो हमें कितना याद आते है
वो जिन्हें हम एक पल भी भूल नही पाते है ,
बड़े होकर वो भाई बहन अक्सर हो जाते है ।।
💐 नरेन्द्र दुबे 💐
Happy Rakshabandhan...
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