Search This Blog

Sunday, 15 September 2019

" सही सलामत है "

इन्द्रधनुष जैसी सतरंगी दुनिया सही सलामत है ,
आँखें उजड़ गई तो क्या है ,सपना सही सलामत है।

जिसका इक - इक तिनका यारों बर्षों पहले बिखर गया ,
मेरी नजर मे उस घर का नक्शा सही सलामत  है ।

हालातों ने कील ठोक दी बेशक अपने सीने मेंं,
मगर गांव मे जाकर सबसे कहना सही सलामत है ।

जिसके शब्दों को हमने आँसू जल से लिखा था ,
उस किताब का अब तक पन्ना-पन्ना सही सलामत है ।

आने वाला वक्त गढ़ेंगे हम खुद अपने हाथों से , 
तन का सबल टूट गया पर मन का सही सलामत है ।

जिस भय की खातिर युग-युग से , हम मर-मर के जिते है ,
जिस सुबह के अमृत की धुन मे , हम जहर के प्याले पीते है ,
इन भूखी प्यासी रूहों पर इक दिन तो करम फरमाएगी ,
वो सुबह कभी तो आएगी ।
,💐💐💐💐💐💐💐💐
ये महलों ये तख्तों ,ये ताजों की दुनिया ,
ये इंसान के दुश्मन समाजों की दुनिया ,
ये दौलत के भूखे रिवाजों की दुनिया ,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है ?
🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂



No comments:

Post a Comment