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Sunday, 1 September 2019

" बदल भी जाओ "

कितना वफा करोगे बेवफा के लिए ,
बदल भी जाओ अब अपनो के लिए।

बहुत याद आए जो अकेला छोड़ गए ,
बहुत खास थे जो जिन्दगी के लिए ।

बातें थी मुहब्बत की जो जिन्दगी बर्बाद की,
तड़प बर्दाश्त की जिन्दगी बसर के लिए  ।

हमें क्या खबर थी प्यार भी उधार हो गये ,
लिए थे दिल वो मेरा ना लौटाने के लिए  ।

 हर सांस मे याद आए बता कैसे भूल जाए ,
चलती है सांसें भी आखिरी मिलन के लिए ।

कोई हालात समझता नही जज्बात भी ,
जिन्दा हूँ तेरे हाथ से कफन के लिए ।

रुठ जाए सारी दुनिया कोई फर्क ही कहा ,
दिल तड़पता मेरा एक मुलाकात के लिए ।

मेरे साथ हुआ बुरा और किसी के साथ ना हो ,
बुरा जो करे दूर हमेशा रहो जिन्दगी के लिए ।
                             ...............😴😴😴




































































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