पल पल उनका साथ निभाने आये हम ,
एक इशारे पर दुनिया छोड़ आए हम ।
समन्दर के बीच पहुँचकर फरेब किया उसने ,
वो कहते तो किनारे पर ही डूब जाते हम ।
मुहब्बतों मे अगर कोई रश्मों - रिवाज ना हो ,
सुकून तबाह ना हो जिन्दगी गुनाह ना हो ।
कुछ अटकलें भी लाजिमी है दिल्लगी के लिए ,
किसी से प्यार अगर हो तो बेपनाह ना हो ।
इस एहतियात से मैं तेरे साथ चला था ,
तेरी निगाह से आगे मेरी निगाह ना हो ।
मेरा वजूद ही है सच्चाइयों का आईना ,
ये बात और कहने वालों ,
मेरा कोई गवाह ना हो ।
..💐💐💐
No comments:
Post a Comment