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Sunday, 15 September 2019

" सब खामोश हैं "

आदमी से आदमी डरने लगा है आजकल ,दिन दहाड़े भीड़ मे कोई भी हो जाता है सबल ।

है पुलिस थाना कचहरी पर सभी खामोश है ,
कर दिया घीसू को लहठन चौधरी ने बेदखल ।

देगची तक लूटकर जुम्मन की डाकू ले गए , 
कह दिया थाने ने उससे हट हरामी चल निकल ।

है अगर जिना तुझे इस दौर मे तो जान ले ,
क्योंं लडाई कर रहा खामोश हो जा कम अकल।

खो गई पहचान अब सारी शराफत की यहाँ  ,
आज नेता माफिया लगते है जुड़वा हम शकल ।

वह पुराणों मे नही है और ना विश्वास मेंं
देखना है स्वर्ग अगर ,देखें मंत्री आवास मे ।

स्वर्ग की सीढ़ी बनी है राजनीति आजकल की ,
क्यों उलझते आप सर्विस की बुरी बकवास मे ।

मंत्री राजा यहाँ के एम.पी. ही है देवता ,
स्वर्ग मे जो भी बताते वह सभी है पास मे ।

आपको पानी नहीं मिलता परेशान हो रहे ,
पी रहे दारू लगाकर कुर्सियां वो घास मे ।

स्वर्ग मे रहते है जीवित , स्वर्गवासी मर बने ,
है धरावासी मगर वो घुमते आकाश मे । 

🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂

देखिए चुपचाप जो भी हो रहा है आजकल ,
क्यों बना बैठा है निर्बल मित्र बन तू भी सबल ।

जीत जाए तो मजे कुर्सी के लेना पाँच साल ,
हार जाए यदि कभी तो चूक मत फिर दल बदल। 
एक बोरा नोट दस गुंडे लगा ले साथ मे ,
फिर समस्या कौन सी है ,जो नही हो पाए हल ।

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