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Friday, 23 August 2019

तुम न आए मगर ......

हर शाम तेरी यादों का लगता पहरा ,
खामोशियों से खेलती धड़कनों को भी 
जैसे ख्याल है तेरा ।

हर मोड़ पर दिल तुम्हें ढूँढता फिरता,
पर हर आहट पर 
हमेशा कोई और ही मिलता ।

शाम से रात आई , तुम न आए मगर 
यादों का पहरा हुआ और घनेरा  
हर रात मेरे पास होती सिसकियाँ 
सवालों का समंदर फिर भी खामोशियाँ 
आँखेंं नम भी हुई ,
तुम न आए मगर ।

तन्हाइयों ने अपनी बांहों मे घेरा 
हर बार चांदनी मे डूबा 
चाँद - तारों की बारात होती 
मेरे दिल मे इंतजार का चिराग 
और मिलन की सौगात होती 
रात ढल भी गई 
तुम न आए मगर ।

मेरी आँखों मे रह गया 
दूर तक छाया अँधेरा 
बेचैन अँधेरा स्याह मगर 
इस तड़पते दिल को सुकून देने 
तुम न आए मगर ।
                               .......😰😰😰😰

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