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Tuesday, 23 July 2019

यादें

               " यादें "
जब भी तेरी याद आई रातों  की निंद गवाँ देता हूँ,
किरण के पहले सुबह सूर्य को जगा देता हूँ   ।
मानो यकीन जितना भूलूँ याद आते हो तुम उतना,
 किसी गरीब के गरीबी का कोई मजाक बनाये जितना ।
बड़ी मगरुर हो ख्याल करो हम महफूज है जान लो,
तोड़ते हो वादें जो चुनाव बाद तोड़ता नेता है जितना ।
जीवन मे उम्मीदें चिराग अँधेरो मे उजाला ला देता हूँ ,
जब भी तेरी याद आई रातों की नींद गवाँ देता हूँ,
किरण के पहली सुबह सूर्य को जगा देता हूँ।    
भूल गए हो तुम हमें क्यो तनहा करके ?
 कहके अपना हमको क्यो गए बेगाना करके ?
झूठे वादे झूठी इरादे ना करना किसी से ऐसा,
क्या हक था तुम्हें राहों मे हमें जाना छोड़ के ।
आज भी वफा है छोड़ के जाने वाले बता देता हूँ,
जब भी तेरी याद आई रातों की नींद गवाँ देता हूँ,
किरण के पहली सुबह सूर्य को जगा देता हूँ....।
हरे -भरे फसलें दिल क्यो गए बर्बाद करके..
सूख ही जाए फूल ये दिल के क्यो गए फैसला करके...।
बदलते है मौसम यूँ दिल के दिलवर नही बदला करते...,
जख्मे दिल पहले ही था  जख्म क्यो गए बढा करके ।
सावन मे तपीस गरमी क्यो , दिल पूछे तो बहला देता हूँ,
जब भी तेरी याद आई रातो की नींद गवाँ देता हूँ,
किरण के पहली सुबह सूर्य को जगा देता हूँ। 
मेरी भी वसूलों में असलियत है बेवफा ना कहेंगे ,
दिल दिया असली ,असलियत है,सौदा ना कहेंगे ।
जरूरत पडे़ तो आवाज देना हमें पहले आयेंगे,अगर खुश हो जुदा होकर  तो हम बेवफा ना कहेंगे ...।
गगन -धरती भूलें नही दूजे ,कैसे कहूँ भूला देता हूँ..,
जब भी तेरी याद आई रातो की नींद गवाँ देता हूँ ,
किरण के पहली सूर्य को सुबह जगा देता हूँ ...।
            💐 नरेन्द्र दुबे 💐   

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