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Wednesday, 24 July 2019

" Dost "

दोस्ती एक रिश्ता है जो निभाए वो फरिश्ता हैं ,      दोस्ती सच्ची प्रीत है ,जुदाई जिसकी रीति  है ।

 जुदा होकर भी ना भूले यही दोस्ती की जीत है ।
बिन सावन की बरसात नही होती ,
                       सूरज डूबे बिन रात नही होती ।
इसीलिए दोस्त किसी का दिल मत तोड़ना ,
   क्योकिं दिल टूटने की कोई आवाज़ नही होती।
अगर हम याल नही करते तो भुलाते भी नही, 
                      हँसाते नही तो रूलाते भी नही ।
हम रोज नये दोस्त बनाते नही ,
                    पर जो बनाते है उसे गवाँते नही ।
मुस्कुराते आप रहो तो खुश हम हो जाएंगे ,
              मंजिल आप पावों जीत हम जाएंगे   ।जिना चाहो अगर किसी और के लिए  तो ,
                          आपके लिए मर हम जाएंंगे।
एहसास के दामन मे आँसू गिराकर देखों ,
         दोस्ती कितनी सच्ची है आजमाकर देखो ।
हमसे दूर होकर हालात कैसी होगी ,
    कभी तुम शीशा पर पत्थर गिराकर तो देखो ।

आज वक्त ने फिर पूछा मुझसे ,
                    तेरा हँसता चेहरा उदास क्यो है ।
तेरी आँखों मे प्यास क्यो है ,
                    जिसके पास तेरे लिए वक्त नही ,
वही तेरे लिए खास क्यो है ।

Tuesday, 23 July 2019

यादें

               " यादें "
जब भी तेरी याद आई रातों  की निंद गवाँ देता हूँ,
किरण के पहले सुबह सूर्य को जगा देता हूँ   ।
मानो यकीन जितना भूलूँ याद आते हो तुम उतना,
 किसी गरीब के गरीबी का कोई मजाक बनाये जितना ।
बड़ी मगरुर हो ख्याल करो हम महफूज है जान लो,
तोड़ते हो वादें जो चुनाव बाद तोड़ता नेता है जितना ।
जीवन मे उम्मीदें चिराग अँधेरो मे उजाला ला देता हूँ ,
जब भी तेरी याद आई रातों की नींद गवाँ देता हूँ,
किरण के पहली सुबह सूर्य को जगा देता हूँ।    
भूल गए हो तुम हमें क्यो तनहा करके ?
 कहके अपना हमको क्यो गए बेगाना करके ?
झूठे वादे झूठी इरादे ना करना किसी से ऐसा,
क्या हक था तुम्हें राहों मे हमें जाना छोड़ के ।
आज भी वफा है छोड़ के जाने वाले बता देता हूँ,
जब भी तेरी याद आई रातों की नींद गवाँ देता हूँ,
किरण के पहली सुबह सूर्य को जगा देता हूँ....।
हरे -भरे फसलें दिल क्यो गए बर्बाद करके..
सूख ही जाए फूल ये दिल के क्यो गए फैसला करके...।
बदलते है मौसम यूँ दिल के दिलवर नही बदला करते...,
जख्मे दिल पहले ही था  जख्म क्यो गए बढा करके ।
सावन मे तपीस गरमी क्यो , दिल पूछे तो बहला देता हूँ,
जब भी तेरी याद आई रातो की नींद गवाँ देता हूँ,
किरण के पहली सुबह सूर्य को जगा देता हूँ। 
मेरी भी वसूलों में असलियत है बेवफा ना कहेंगे ,
दिल दिया असली ,असलियत है,सौदा ना कहेंगे ।
जरूरत पडे़ तो आवाज देना हमें पहले आयेंगे,अगर खुश हो जुदा होकर  तो हम बेवफा ना कहेंगे ...।
गगन -धरती भूलें नही दूजे ,कैसे कहूँ भूला देता हूँ..,
जब भी तेरी याद आई रातो की नींद गवाँ देता हूँ ,
किरण के पहली सूर्य को सुबह जगा देता हूँ ...।
            💐 नरेन्द्र दुबे 💐   

Sunday, 21 July 2019

                          "   मतलबी दुनिया  "
         कितने मतलब पालते है लोग जमाने मे ,      मतलब से मतलब लोग रखते है जमाने मे  ।
   एक हम समझते है ढूँढते है दिल के खजाने मे,
 लोग मिलते तो है ,अपने दिल के बहाने मे ।
 हर कोई कहता दिल के अजीज हो तुम तो मेरे,
मगर वफा ढूँढने लगे तो मिली बेवफाई जमाने मे,
हर शाख पर बैठे एक शख्स धू्र्त बनाने मे   ।
मतलब से मतलब लोग रखते है जमाने मे,
कहने के तो होते कुछ खास लोग जमाने मे,
भ्रम है दिल का ,काम आते दिल को बहलाने मे।
समझना भूल जा अपना सबको अब जमाने मे।
लोग दिमाग से रखते है मतलब ,दिल से बेगाने मे।
दिल की बातें ना किसी से ना कहो जमाने मे ,
दिल से नफरत मिट्ठी बातें करते लोग जमाने मे।
मिट्ठी बातें बोले मगर समझे बेगाना जमाने मे,
मतलब से मतलब लोग रखते है जमाने मे।
Meri jindagi se Judi ek Ajeeb kahani hai. Jab mai chota tha Kareeb 5 saal ka sapne mein bahut hoshiyar tha.uska Shri mere bade bhaiya bam Bhola ji Dubey ko jata hai. Main mujhe apne bete se bhi jyada mante the.mujhe roj subah mein jagana aur samay se school ke liye taiyar karna unka Delhi ka kaam tha. Main sochta tha ki padh likh kar ke ek bahut bada Aadmi banna hai. Lekin niyati ko kuch aur hi Manzoor tha. Waise main middle class family se belong Karta hu. Jab main 10th class mein aaya. Tab mere sar se mere maa baap ka saya uth Gaya. Ghar mein aamdani kharcha Riya ki koi aur dusra nahi tha shivaya pitaji ke. Mujhe marte Hain mere sapne choor choor Ho Gaye. Jaise taise main board ka exam pass kiya. Uske baad aage ki padhai ke liye ghar mein paise nahin the.phir hume Apne Ghar ki chinta sataye lagi. Phir hamdubhai kamane ke liye bahar nikal Gaye. Hum dono ne apne ek rishtedar ke yahan Gaya. Wahan jane ke bad pata chala is duniya mein apna koi nahin hai. Logo ne hum log ke sath bahut bura vyavahar Kiya. Hum dono Bhai apni kismat ko dosi manker khub rote the ...kuchh Dino bad Jaise Sadat si ban gayi ..Subah 4 baje jagna aur duty ke liye taiyar hona. Idiot Kanta paidal chalkar company pahunchna. Wahan jakar kaam karte hue bhi company ke staffo ka dhaus Sahna..Mujhe real me ye pata chala ki duniya me jiske ma bap nhi hai unka koi nhi ..So Mai ya kahunga ki mabap hi Bhagwan hai . Unke sath hamesha achha bertav kare.