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Friday, 23 August 2019

तुम न आए मगर ......

हर शाम तेरी यादों का लगता पहरा ,
खामोशियों से खेलती धड़कनों को भी 
जैसे ख्याल है तेरा ।

हर मोड़ पर दिल तुम्हें ढूँढता फिरता,
पर हर आहट पर 
हमेशा कोई और ही मिलता ।

शाम से रात आई , तुम न आए मगर 
यादों का पहरा हुआ और घनेरा  
हर रात मेरे पास होती सिसकियाँ 
सवालों का समंदर फिर भी खामोशियाँ 
आँखेंं नम भी हुई ,
तुम न आए मगर ।

तन्हाइयों ने अपनी बांहों मे घेरा 
हर बार चांदनी मे डूबा 
चाँद - तारों की बारात होती 
मेरे दिल मे इंतजार का चिराग 
और मिलन की सौगात होती 
रात ढल भी गई 
तुम न आए मगर ।

मेरी आँखों मे रह गया 
दूर तक छाया अँधेरा 
बेचैन अँधेरा स्याह मगर 
इस तड़पते दिल को सुकून देने 
तुम न आए मगर ।
                               .......😰😰😰😰

Wednesday, 7 August 2019

" जिन्दगी गुनाह ना हो "

पल पल उनका साथ निभाने आये हम ,
एक इशारे पर दुनिया छोड़ आए हम ।

समन्दर के बीच पहुँचकर फरेब किया उसने ,
वो कहते तो किनारे पर ही डूब जाते हम ।

मुहब्बतों मे अगर कोई रश्मों - रिवाज ना हो ,
सुकून तबाह ना हो जिन्दगी गुनाह ना हो ।

कुछ अटकलें भी लाजिमी है दिल्लगी के लिए ,
किसी से प्यार अगर हो तो बेपनाह ना हो ।

इस एहतियात से मैं तेरे साथ चला था ,
तेरी निगाह से आगे मेरी निगाह ना हो ।

मेरा वजूद ही है सच्चाइयों का आईना ,
ये बात और कहने वालों ,
              मेरा कोई गवाह ना हो    ।
                                                ..💐💐💐            

" सोते रहे "

परखते रहे वो हमें सारी जिन्दगी ,और हम 
भी उनके हर इम्तहान मे पास होते रहे ।

मजा आ रहा था उन्हें हमारी आँसुओं की बारिश 
मे ,और हम भी बिना रूके उनके लिए रोते रहे ।।

बेदर्द थे वो इस कदर  निंद हमारी ,
उडाकर खुद चैन से सोते रहे        ।

जिन्हें पाने के लिए हमनें सब कुछ लुटा दिया ,
वो हमें हर कदम पर ऐसे ही खोते रहे  ।।

और एक दिन जब हुआ इसका एहसास उन्हें,
वो हमारे पास आकर पूरे दिन रोते रहे  ।।

और हम भी इतने खुदगर्ज निकले यारों कि,
आँखें बंद कर कफन मे सोते रहे ।।

                                       .........🎂🎂🎂🎂🎂

Sunday, 4 August 2019

" दूर हो जाते है "

बड़े होकर भाई-बहन सोचों कितने दूर हो जाते है, व्यस्त है सभी इतना कि मिलन को मजबूर हो जाते है ।

एक दिन भी जिनके बिन हम रह नही पाते थे , 
अब सब अपनी जिन्दगी मे मसरुफ हो जाते हैं ।

छोटी-छोटी बातें बताए बिन हम रह नही पाते थे ,
अब बड़े - बड़े मुश्किलों से हम अकेले ही जूझ जाते हैं ।

ऐसा भी नही कि उनकी अहमियत नही है कोई,
पर अपनी तकलीफें जाने क्यों उनसे छुपाते हैं ।

रिश्ते नयी जिन्दगी से कितने जुड़ते चले जाते है ,
और बचपन के रिश्ते कही दूर चले जाते है ।

खेल - खेल मे रुठना मनाना रोज की बात थी अब छोटी सी गलतफहमी दिल से दूर कर जाती                            है।

अब सब अपनी उलझनों मे उलझ के रह जाते है 
कैसे बताए उन्हें हम वो हमें कितना याद आते है 

वो जिन्हें हम एक पल भी भूल नही पाते है      , 
बड़े होकर वो भाई बहन अक्सर  हो जाते है    ।।
    
                           💐 नरेन्द्र दुबे 💐
               Happy Rakshabandhan...